क्यों बार-बार भंग हो रही है हरियाणा की शांति खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकवादी क्यों बनाते हैं हरियाणा को निशाना

अब तक देखा जा रहा था कि हरियाणा में गैंगस्टर्स के जरिये ही दहशत फैलाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन फरीदाबाद में जैश के टेरर मॉड्यूल और सिरसा में महिला थाने पर ग्रेनेड अटैक के बाद करनाल में कर्ण लेक के पास दो ग्रेनेड मिलने और महेंद्रगढ़ जिले में पाकिस्तान लिखा बड़ा बैलून मिलने की घटनाओं से साफ है कि अब और भी संगठन हरियाणा में दहशत फैलाने की कोशिश में हैं।
सिरसा महिला थाना पर हमले के बाद इसका बाकायदा वीडियो भी सामने आया और खालिस्तानी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली। बड़ी ही आसानी से इस घटना को अंजाम दिया गया। अहम बात है कि कैथल में बीते कुछ माह पहले ऐसे ही थाने पर ग्रेनेड फेंका गया था। पाकिस्तानी डॉन शहजाद भाटी ने भी दावा किया कि सिरसा में यह अटैक उन्होंने करवाया।
असल में हरियाणा एक तरफ पंजाब के साथ लंबा जुड़ा हुआ है तो दूसरी तरफ हरियाणा की सीमाएं दिल्ली से लगती हैं। पंजाब में लंबे समय तक खालिस्तान समर्थक लड़ाई चलती रही है। यह संगठन फिलहाल ज्यादा सक्रिय नहीं है लेकिन कभी-कभी कोई घटना कर यह अपने उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास करते हैं। जब पंजाब में खालिस्तानी आंदोलन चल रहा था और पंजाब आतंकवाद की चपेट में था तब हरियाणा के दर्जनों शहरों में आंतकी घटनाएं हुईं और इसमें प्रदेश के सैकड़ों लोगों की जान गई।
इधर कश्मीरी आतंकवादी दिल्ली को अपना निशाना बनाते हैं और उसमें दिल्ली के साथ लगता हरियाणा भी शामिल होता है। हरियाणा के मेवात के मुस्लिम बहुल इलाके का होना कश्मीरी आतंकवादियों को काफी रास आता है। प्रदेश का गुरुग्राम पूरे विश्व के नक्शे पर अपनी पहचान रखता है यहां देश के अलग-अलग इलाकों से लोग आकर कार्य करते हैं। कश्मीरी आतंकियों को यह इलाका भी रास आता है लेकिन, जैश-ए-मोहम्मद ने हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपना बड़ा अड्डा बना लिया था। इस केंद्र पर आसानी से किसी की नजर नहीं जा रही थी लेकिन जब डॉक्टर मुजम्मिल पकड़ा गया तो उसके बाद इतने बड़े राज खुलने शुरू हुए कि अभी भी हर रोज कोई ना कोई बड़ा राज खुल ही जाता है।
जहां तक सवाल पंजाब के खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों का है तो पंजाब में आने वाले चुनाव और हाल ही में जिस प्रकार चंडीगढ़ का मामला उठा है तो एक बार फिर यह लोग सिर उठाने का प्रयास करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
यह सही है कि प्रदेश में और देश में जिस प्रकार से जांच एजेंसियां सक्रिय हैं उसके चलते यह लोग अपने मंसूबों में आसानी से कामयाब नहीं हो सकते। दिल्ली में लाल किले के बाहर कार बम धमाका डॉक्टर उमर ने हताशा में किया। इससे पहले वह देश के कई इलाकों में और खासकर 6 दिसंबर को अयोध्या में बड़े धमाके की तैयारी में था। लेकिन जब उनका विस्फोटक पकड़ा गया और उसके साथी पकड़े जाने लगे तो उसने खुद को फिदायीन बनाकर यह धमाका किया।
हरियाणा पुलिस में अब सभी जगह एंटी टेरर टीम का गठन किया जा रहा है। इससे भी हरियाणा में शांति साबित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।